बाढ़ २०१७ एक नजर में

बिहार एक बाढ़ प्रवण राज्य है किन्तु वर्ष 2017 में कुछ ऐसे जिले तथा इलाकों में भयावह बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हुई जो पारम्परिक रूप से बाढ़ के लिए नहीं जाने जाते हैं। उदाहरण स्वरूप अररिया ,फारबिसगंज, जोकीहाट, किशनगंज, पश्चिमी चम्पारण (गौनाहा, सिकटा, नरकटियागंज), पूर्वी चम्पारण (सुगौली)।

दिनांक 11, 12 एवं 13 अगस्त, 2017 को बिहार के कतिपय जिले एवं नेपाल के समीपवर्ती इलाकों में अधिक मात्रा में वर्षा के कारण कई सुप्तप्राय नदियों में भी उफान आ गया जिससे आस पास के क्षेत्रों में अचानक 4 से 6 फीट तक पानी का बहाव होने लगा जिसके चलते जान माल एवं आधारभूत संरचना की काफी क्षति हुई। उदाहरण स्वरूप अररिया जिले में अगस्त माह का औसत वर्षापात 347 मि०मी० है परन्तु तीन दिनों में कुल 363.34 मि०मी० वर्षा हुई - सिकटी, कुर्साकांटा एवं फारबिसगंज में 400 मि०मी० से ज्यादा वर्षा हुई है। यही कारण है कि इन इलाकों में जान माल (80 से अधिक व्यक्तियों की मृत्यु) एवं आधारभूत संरचना की सर्वाधिक क्षति हुई है।

यही स्थिति किशनगंज जिले की है जहाँ अगस्त माह का औसत वर्षापात् 462.03 मि०मी० है वहाँ 3 दिनों में 650 मि०मी० से ज्यादा वर्षा हुई। साथ-ही-साथ तिस्ता बराज से भी इसी अवधि में 50,000 क्यूसेक से अधिक पानी छोड़ दिया गया, फलस्वरूप जलस्तर में अप्रत्याशित वृद्धि एवं जान माल की भारी क्षति हुई। पश्चिमी एवं पूर्वी चम्पारण तथा उसके समीपवर्ती नेपाल के क्षेत्रों में भी कमोबेश यर्ही िस्थति थी। तीन दिनों में इन क्षेत्रों के नेपाल के समीपवर्ती इलाकों में 508 मि०मी० से ज्यादा वर्षा हुई। वहीं पश्चिमी चम्पारण में अगस्त माह का औसत वर्षापात 349 मि०मी० है। वहाँ तीन दिनों में 200 मि०मी० से ज्यादा वर्षा हुई।

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